मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी  – Mirza Ghalib Shayari in Hindi

मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी – Mirza Ghalib Shayari in Hindi

August 23, 2018 2 By Rupesh Goyal

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मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी

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गैर ले महफ़िल में बोसे जाम के
हम रहें यूँ तश्ना-ऐ-लब पैगाम के
खत लिखेंगे गरचे मतलब कुछ न हो
हम तो आशिक़ हैं तुम्हारे नाम के
इश्क़ ने “ग़ालिब” निकम्मा कर दिया
वरना हम भी आदमी थे काम के

Aaya Hai Be-Kasi-e-Ishq Pe Rona Ghalib,
Kiske Ghar Jayega Sailab-e-Bala Mere Baad.
आया है बे-कसी-ए-इश्क पे रोना ग़ालिब,
किसके घर जायेगा सैलाब-ए-बला मेरे बाद।
मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी

इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना
दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना
Isharat-E-Qatara Hai Dariya Mein Fana Ho Jaana
Dard Ka Had Se Guzarna Hai Dva Ho Jaana

हजारो खवायिशे ऐसी की हर ख्वाइश पे दम निकाले
बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी काम निकाले।
क़र्ज़ की पीते थे मय लेकिन समझते थे कि हाँ
रंग लावेगी हमारी फ़ाक़ा-मस्ती एक दिन
Mirza Ghalib Shayari in Hindi

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दिया है दिल अगर उस को , बशर है क्या कहिये
हुआ रक़ीब तो वो , नामाबर है , क्या कहियेयह ज़िद की आज न आये और आये बिन न रहे
काजा से शिकवा हमें किस क़दर है , क्या कहिये
ज़ाहे -करिश्मा के यूँ दे रखा है हमको फरेब
की बिन कहे ही उन्हें सब खबर है , क्या कहिये
समझ के करते हैं बाजार में वो पुर्सिश -ऐ -हाल
की यह कहे की सर -ऐ -रहगुज़र है , क्या कहियेतुम्हें नहीं है सर-ऐ-रिश्ता-ऐ-वफ़ा का ख्याल
हमारे हाथ में कुछ है , मगर है क्या कहिये
कहा है किस ने की “ग़ालिब ” बुरा नहीं लेकिन
सिवाय इसके की आशुफ़्तासार है क्या कहिये
मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी

Un Ke Dekhe Se Jo Aa Jaati Hai Munh Par Raunaq
Vo Samajhte Hain Ki Bimar Ka Haal Achchha Hai
उन के देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़
वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है
Mirza Ghalib Shayari in Hindi

बुलबुल के कारोबार पे हैं ख़ंदा-हा-ए-गुल
कहते हैं जिस को इश्क़ ख़लल है दिमाग़ का
ख़ंदा-हा-ए-गुल = फूलों की हंसी
मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी

मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी 2018

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फिर तेरे कूचे को जाता है ख्याल
दिल -ऐ -ग़म गुस्ताख़ मगर याद आया
कोई वीरानी सी वीरानी है .
दश्त को देख के घर याद आया
सादगी पर उस के मर जाने की हसरत दिल में है

बस नहीं चलता की फिर खंजर काफ-ऐ-क़ातिल में है
देखना तक़रीर के लज़्ज़त की जो उसने कहा
मैंने यह जाना की गोया यह भी मेरे दिल में है

‘ग़ालिब’ बुरा न मान जो वाइज बुरा कहे,
ऐसा भी कोई है की सब अच्छा कहे जिसे ।
इश्क पर जोर नहीं है ये वो आतिश ‘ग़ालिब’
की लगाए न लगे और बुझाए न बने ।
Mirza Ghalib Shayari in Hindi

हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन
दिल के खुश रखने को “ग़ालिब” यह ख्याल अच्छा है
फिर उसी बेवफा पे मरते हैं
फिर वही ज़िन्दगी हमारी है
बेखुदी बेसबब नहीं ‘ग़ालिब’
कुछ तो है जिस की पर्दादारी है
मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी

Bazicha-e-atfal Hai Duniya Mire Aage
Hota Hai Shab-o-roz Tamasha Mire Aage
बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मिरे आगे

हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है
तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तुगू क्या है
Har ek baat pe kehate ho tum ki tu kya hai
Tumhi kaho ki ye andaaz-e-guftugoo kya hai

Teri Wafaa Se Kya Ho Talafi Ki Dahar Mein,
Tere Siwa Bhi Hum Pe Bahut Se Sitam Hue.
तेरी वफ़ा से क्या हो तलाफी की दहर में,
तेरे सिवा भी हम पे बहुत से सितम हुए।
Mirza Ghalib Shayari in Hindi

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मौत का एक दिन मुअय्यन है
नींद क्यूँ रात भर नहीं आती
आगे आती थी हाल-ए-दिल पे हँसी
अब किसी बात पर नहीं आती
मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी

सबने पहना था बड़े शौक से कागज़ का लिबास
जिस कदर लोग थे बारिश में नहाने वाले
अदल के तुम न हमे आस दिलाओ
क़त्ल हो जाते हैं , ज़ंज़ीर हिलाने वाले

इस नज़ाकत का बुरा हो , वो भले हैं तो क्या
हाथ आएँ तो उन्हें हाथ लगाए न बने
कह सके कौन के यह जलवागरी किस की है
पर्दा छोड़ा है वो उस ने के उठाये न बने
मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी

Dard Minnat-kash-e-dava Na Hua
Main Na Achchha Hua Bura Na Hua
दर्द मिन्नत-कश-ए-दवा न हुआ
मैं न अच्छा हुआ बुरा न हुआ
Mirza Ghalib Shayari in Hindi

दुःख देकर सवाल करते हो,
तुम भी जानम कमाल करते हो,
देख कर पूछ लिया हाल मेरा,
चलो कुछ तो ख्याल करते हो,

शहर-ए दिल में ये उदासियाँ कैसी,
ये भी मुझसे सवाल करते हो,
मरना चाहें तो मर नहीं सकते,
तुम भी जीना मुहाल करते हो,
अब किस-किस की मिसाल दूँ तुम को,
हर सितम बे-मिसाल करते हो।
मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी

मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी लेटेस्ट & बेस्ट

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मेह वो क्यों बहुत पीते बज़्म-ऐ-ग़ैर में या रब
आज ही हुआ मंज़ूर उन को इम्तिहान अपना
मँज़र इक बुलंदी पर और हम बना सकते “ग़ालिब”
अर्श से इधर होता काश के माकन अपना
Mirza Ghalib Shayari in Hindi

Jee Dhoondta Hai Phir Wahi Fursat Ke Raat Din,
Baithe Rahe Tasawwur-e-Janaan Kiye Huye.
जी ढूंढ़ता है फिर वही फुर्सत के रात दिन,
बैठे रहे तसव्वुर-ए-जहान किये हुए।
मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी

फिर तेरे कूचे को जाता है ख्याल
दिल -ऐ -ग़म गुस्ताख़ मगर याद आया
कोई वीरानी सी वीरानी है .
दश्त को देख के घर याद आया
सादगी पर उस के मर जाने की हसरत दिल में है

बस नहीं चलता की फिर खंजर काफ-ऐ-क़ातिल में है
देखना तक़रीर के लज़्ज़त की जो उसने कहा
मैंने यह जाना की गोया यह भी मेरे दिल में है
मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी

आँखें जो खुली तो उन्हें अपने करीब पाया ना था
कभी थे रूह में शामिल आज उनका साया ना था
बेपनाह मोहब्बत की जिनसे उम्मीदें लिये बैठे थे
उनसे तन्हाइयों की सौगातें मिलेंगी बताया ना था
एक हम ही कसीदे हुस्न के हर बार पढ़ते रहे पर
उसने तो कभी हाल-ए-दिल सुनाया ना था
Mirza Ghalib Shayari in Hindi

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मैं उन्हें छेड़ूँ और कुछ न कहें
चल निकलते जो में पिए होते
क़हर हो या भला हो , जो कुछ हो
काश के तुम मेरे लिए होते
मेरी किस्मत में ग़म गर इतना था
दिल भी या रब कई दिए होते
आ ही जाता वो राह पर ‘ग़ालिब ’
कोई दिन और भी जिए होते

Hain Aur Bhi Duniya Men Sukhan-var Bahut Achchhe
Kahte Hain Ki ‘ġhalib’ Ka Hai Andaz-e-bayan Aur
हैं और भी दुनिया में सुख़न-वर बहुत अच्छे
कहते हैं कि ‘ग़ालिब’ का है अंदाज़-ए-बयाँ और
Mirza Ghalib Shayari in Hindi

इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ ख़ुदा
लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं
Is Saadagee Pe Kaun Na Mar Jae Ae Khuda
Ladate Hain Aur Haath Mein Talavaar Bhee Nahin
मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी

Aashiqi Sabr Talab Aur Tamanna Betab,
Dil Ka Kya Rang Karun Khoon-E-Jigar Hone Tak.
आशिकी सब्र तलब और तमन्ना बेताब,
दिल का क्या रंग करूँ खून-ए-जिगर होने तक।
Mirza Ghalib Shayari in Hindi